श्री हनुमान चालीसा

Shri Hanuman Chalisa

Deity: Shri HanumanType: Chalisa12 min readLanguage: HindiWith meaning & transliteration

Complete Hanuman Chalisa by Goswami Tulsidas — all 40 chaupais and dohas with transliteration and meaning.

हनुमान चालीसा का महत्व

हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा अवधी भाषा में रचित ४० चौपाइयों की स्तुति है, जो भगवान हनुमान की महिमा, बल और राम-भक्ति का गुणगान करती है। मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। नियमित पाठ से भय, संकट और रोग दूर होते हैं तथा मन में साहस और भक्ति का संचार होता है।

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

Shri Guru Charan Saroj Raj, Nij Manu Mukuru Sudhaari. Baranau Raghubar Bimal Jasu, Jo Daayaku Phal Chaari.

श्रीगुरु के चरण-कमलों की धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ करके मैं श्रीराम के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) देने वाला है।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार।बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥

Buddhiheen Tanu Jaanike, Sumirau Pavan Kumaar. Bal Budhi Vidya Dehu Mohi, Harahu Kalesh Vikaar.

अपने को बुद्धिहीन जानकर मैं पवनपुत्र हनुमान का स्मरण करता हूँ। हे प्रभु, मुझे बल, बुद्धि और विद्या दीजिए तथा मेरे क्लेश एवं विकारों को हर लीजिए।

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥

Jai Hanuman Gyaan Gun Saagar. Jai Kapees Tihu Lok Ujaagar.

हे ज्ञान और गुणों के सागर हनुमान, आपकी जय हो! हे कपीश्वर, तीनों लोकों में प्रकाशमान आपकी जय हो!

राम दूत अतुलित बल धामा।अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥

Ram Doot Atulit Bal Dhaama. Anjani Putra Pavansut Naama.

आप श्रीराम के दूत और अतुलनीय बल के धाम हैं। आप अंजनी के पुत्र और 'पवनसुत' नाम से विख्यात हैं।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।कुमति निवार सुमति के संगी॥

Mahaveer Vikram Bajrangi. Kumati Nivaar Sumati Ke Sangi.

हे महावीर बजरंगबली, आप पराक्रमी हैं; आप कुबुद्धि को दूर करते हैं और सद्बुद्धि वालों के साथी हैं।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।कानन कुंडल कुंचित केसा॥

Kanchan Baran Viraaj Subesa. Kaanan Kundal Kunchit Kesa.

आपका वर्ण स्वर्ण के समान है और आप सुंदर वेश में सुशोभित हैं; आपके कानों में कुंडल और घुँघराले केश शोभा देते हैं।

हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै।काँधे मूँज जनेऊ साजै॥

Haath Vajra Aru Dhwaja Viraajai. Kaandhe Moonj Janeu Saajai.

आपके हाथों में वज्र (गदा) और ध्वजा सुशोभित है तथा कंधे पर मूँज का जनेऊ सजा हुआ है।

शंकर सुवन केसरी नंदन।तेज प्रताप महा जग बंदन॥

Shankar Suvan Kesari Nandan. Tej Prataap Maha Jag Bandan.

आप शंकर के अंश और केसरी के पुत्र हैं। आपका तेज और प्रताप महान है और समस्त जगत आपकी वंदना करता है।

विद्यावान गुनी अति चातुर।राम काज करिबे को आतुर॥

Vidyaavaan Guni Ati Chaatur. Ram Kaaj Karibe Ko Aatur.

आप विद्यावान, गुणी और अत्यंत चतुर हैं तथा श्रीराम के कार्य करने के लिए सदा आतुर रहते हैं।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।राम लखन सीता मन बसिया॥

Prabhu Charitra Sunibe Ko Rasiya. Ram Lakhan Sita Man Basiya.

आप प्रभु श्रीराम की कथा सुनने में आनंद लेते हैं; राम, लक्ष्मण और सीता आपके मन में बसे हुए हैं।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।बिकट रूप धरि लंक जरावा॥

Sukshma Roop Dhari Siyahi Dikhaava. Vikat Roop Dhari Lank Jaraava.

आपने सूक्ष्म रूप धारण कर माता सीता को दर्शन दिए और विकराल रूप धारण कर लंका को जला दिया।

भीम रूप धरि असुर सँहारे।रामचंद्र के काज सँवारे॥

Bheem Roop Dhari Asur Sanhaare. Ramchandra Ke Kaaj Sanvaare.

आपने विशाल रूप धारण कर राक्षसों का संहार किया और श्रीरामचंद्र के सभी कार्य सँवार दिए।

लाय सजीवन लखन जियाये।श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥

Laay Sajeevan Lakhan Jiyaaye. Shri Raghubeer Harashi Ur Laaye.

आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण को जीवित किया, जिससे श्रीराम ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

Raghupati Keenhi Bahut Badaai. Tum Mam Priya Bharatahi Sam Bhaai.

श्रीराम ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा — तुम मुझे भरत के समान प्रिय भाई हो।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥

Sahas Badan Tumharo Jas Gaavai. As Kahi Shripati Kanth Lagaavai.

(श्रीराम बोले) सहस्र मुख वाले शेषनाग भी तुम्हारा यश गाते हैं — ऐसा कहकर श्रीपति ने आपको गले से लगा लिया।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।नारद सारद सहित अहीसा॥

Sanakaadik Brahmaadi Muneesa. Naarad Saarad Sahit Aheesa.

सनक आदि ऋषि, ब्रह्मा आदि देवता, नारद, सरस्वती और शेषनाग सहित सभी आपका गुणगान करते हैं।

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥

Jam Kuber Digpaal Jahaan Te. Kavi Kovid Kahi Sake Kahaan Te.

यमराज, कुबेर और दिक्पाल भी आपका यश गाते हैं; फिर कवि और विद्वान आपकी महिमा का पूर्ण वर्णन कैसे कर सकते हैं?

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।राम मिलाय राज पद दीन्हा॥

Tum Upkaar Sugrivahi Keenha. Ram Milaay Raaj Pad Deenha.

आपने सुग्रीव पर उपकार किया — उन्हें श्रीराम से मिलाकर राजपद दिलाया।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।लंकेश्वर भए सब जग जाना॥

Tumharo Mantra Vibhishan Maana. Lankeshwar Bhaye Sab Jag Jaana.

आपके परामर्श को विभीषण ने माना, जिसके फलस्वरूप वे लंका के राजा बने — यह सारा संसार जानता है।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

Jug Sahasra Jojan Par Bhaanu. Leelyo Taahi Madhur Phal Jaanu.

जो सूर्य हजारों योजन दूर है, उसे आपने मधुर फल समझकर निगल लिया था।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥

Prabhu Mudrika Meli Mukh Maahi. Jaladhi Laanghi Gaye Achraj Naahi.

प्रभु श्रीराम की अँगूठी मुख में रखकर आप समुद्र लाँघ गए — इसमें कोई आश्चर्य नहीं।

दुर्गम काज जगत के जेते।सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥

Durgam Kaaj Jagat Ke Jete. Sugam Anugrah Tumhre Tete.

संसार में जितने भी कठिन कार्य हैं, वे सब आपकी कृपा से सहज हो जाते हैं।

राम दुआरे तुम रखवारे।होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥

Ram Duaare Tum Rakhvaare. Hot Na Aagya Binu Paisaare.

आप श्रीराम के द्वार के रक्षक हैं; आपकी आज्ञा के बिना कोई भीतर प्रवेश नहीं कर सकता।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।तुम रक्षक काहू को डर ना॥

Sab Sukh Lahai Tumhaari Sarna. Tum Rakshak Kaahu Ko Dar Na.

आपकी शरण में आने से सभी सुख प्राप्त होते हैं; जब आप रक्षक हैं तो किसी का भय नहीं रहता।

आपन तेज सम्हारो आपै।तीनों लोक हाँक तें काँपै॥

Aapan Tej Samhaaro Aapai. Teeno Lok Haank Te Kaanpai.

अपने तेज को आप ही सँभाल सकते हैं; आपकी हुँकार से तीनों लोक काँप उठते हैं।

भूत पिशाच निकट नहिं आवै।महाबीर जब नाम सुनावै॥

Bhoot Pishaach Nikat Nahi Aavai. Mahaveer Jab Naam Sunaavai.

जहाँ 'महावीर हनुमान' का नाम सुनाया जाता है, वहाँ भूत-पिशाच निकट भी नहीं आते।

नासै रोग हरै सब पीरा।जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

Naasai Rog Harai Sab Peera. Japat Nirantar Hanumat Beera.

वीर हनुमान का निरंतर जप करने से सभी रोग नष्ट हो जाते हैं और समस्त पीड़ा दूर हो जाती है।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥

Sankat Te Hanuman Chhudaavai. Man Kram Bachan Dhyaan Jo Laavai.

जो मन, कर्म और वचन से हनुमान जी का ध्यान करता है, हनुमान जी उसे संकट से मुक्त कर देते हैं।

सब पर राम तपस्वी राजा।तिन के काज सकल तुम साजा॥

Sab Par Ram Tapasvi Raaja. Tin Ke Kaaj Sakal Tum Saaja.

तपस्वी राजा श्रीराम सब पर शासन करते हैं और उनके सभी कार्य आपने ही सँवारे हैं।

और मनोरथ जो कोई लावै।सोई अमित जीवन फल पावै॥

Aur Manorath Jo Koi Laavai. Soi Amit Jeevan Phal Paavai.

जो कोई आपके पास कोई भी मनोकामना लेकर आता है, वह असीम और शुभ फल प्राप्त करता है।

चारों जुग परताप तुम्हारा।है परसिद्ध जगत उजियारा॥

Chaaro Jug Partaap Tumhaara. Hai Parsiddh Jagat Ujiyaara.

आपका प्रताप चारों युगों में विख्यात है और सम्पूर्ण जगत में प्रकाशमान है।

साधु संत के तुम रखवारे।असुर निकंदन राम दुलारे॥

Saadhu Sant Ke Tum Rakhvaare. Asur Nikandan Ram Dulaare.

आप साधु-संतों के रक्षक, राक्षसों का नाश करने वाले और श्रीराम के प्रिय (दुलारे) हैं।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।अस बर दीन्ह जानकी माता॥

Ashta Siddhi Nau Nidhi Ke Daata. As Bar Deenh Jaanki Maata.

माता जानकी ने आपको यह वरदान दिया कि आप आठ सिद्धियों और नौ निधियों के दाता हैं।

राम रसायन तुम्हरे पासा।सदा रहो रघुपति के दासा॥

Ram Rasaayan Tumhre Paasa. Sada Raho Raghupati Ke Daasa.

राम-भक्ति रूपी रसायन सदा आपके पास है; आप सर्वदा श्रीराम के दास बने रहते हैं।

तुम्हरे भजन राम को पावै।जनम जनम के दुख बिसरावै॥

Tumhre Bhajan Ram Ko Paavai. Janam Janam Ke Dukh Bisraavai.

आपका भजन करने से मनुष्य श्रीराम को प्राप्त करता है और जन्म-जन्मांतर के दुःख भूल जाता है।

अंत काल रघुबर पुर जाई।जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥

Ant Kaal Raghubar Pur Jaai. Jahaan Janma Haribhakt Kahaai.

अंत समय में भक्त श्रीराम के धाम को जाता है और वहाँ जन्म लेकर हरि-भक्त कहलाता है।

और देवता चित्त न धरई।हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥

Aur Devta Chitt Na Dharai. Hanumat Sei Sarb Sukh Karai.

जो अन्य देवताओं को मन में न रखकर केवल हनुमान जी की सेवा करता है, वह सभी सुख प्राप्त करता है।

संकट कटै मिटै सब पीरा।जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

Sankat Katai Mitai Sab Peera. Jo Sumirai Hanumat Balbeera.

जो बलवीर हनुमान का स्मरण करता है, उसके संकट कट जाते हैं और सभी पीड़ाएँ मिट जाती हैं।

जय जय जय हनुमान गोसाईं।कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥

Jai Jai Jai Hanuman Gosaai. Kripa Karahu Gurudev Ki Naai.

हे स्वामी हनुमान, आपकी जय हो, जय हो, जय हो! गुरुदेव के समान मुझ पर कृपा कीजिए।

जो सत बार पाठ कर कोई।छूटहि बंदि महा सुख होई॥

Jo Sat Baar Paath Kar Koi. Chhootahi Bandi Maha Sukh Hoi.

जो कोई इसका सौ बार पाठ करता है, वह बंधनों से मुक्त हो जाता है और महान सुख प्राप्त करता है।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।होय सिद्धि साखी गौरीसा॥

Jo Yah Padhai Hanuman Chalisa. Hoy Siddhi Saakhi Gaureesa.

जो यह हनुमान चालीसा पढ़ता है, उसे सिद्धि प्राप्त होती है — इसके साक्षी स्वयं गौरीपति शिव हैं।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥

Tulsidas Sada Hari Chera. Keejai Naath Hriday Mah Dera.

तुलसीदास सदा श्रीहरि के सेवक हैं; हे नाथ, आप मेरे हृदय में निवास कीजिए।

दोहा

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

Pavantanay Sankat Haran, Mangal Moorti Roop. Ram Lakhan Sita Sahit, Hriday Basahu Sur Bhoop.

हे पवनपुत्र, संकटों को हरने वाले और मंगलमय स्वरूप! हे देवताओं के राजा, राम, लक्ष्मण और सीता सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।

पाठ विधि

स्नान कर स्वच्छ आसन पर बैठें, हनुमान जी के समक्ष दीप जलाएँ और लाल पुष्प अर्पित करें। मंगलवार अथवा शनिवार को पाठ का आरंभ करना शुभ है। पाठ से पूर्व श्रीराम का स्मरण करें और शांत मन से चालीसा का गायन करें। पाठ के अंत में बूँदी या गुड़-चने का भोग लगाएँ।