विष्णु सहस्रनाम

Vishnu Sahasranamam

Deity: Lord VishnuType: Stotra8 min readLanguage: SanskritWith meaning & transliteration

Vishnu Sahasranamam — Dhyana shlokas and the opening names with meanings, from the Mahabharata.

विष्णु सहस्रनाम का महत्व

विष्णु सहस्रनाम भगवान विष्णु के एक हजार दिव्य नामों का संग्रह है, जो महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया। यह हिंदू धर्म के सर्वाधिक पवित्र स्तोत्रों में से एक है। मान्यता है कि इसके पाठ से मन को शांति, भय से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पूर्णता-सूचना: सम्पूर्ण विष्णु सहस्रनाम अत्यंत विस्तृत (१०० से अधिक श्लोक) है। यहाँ ध्यान श्लोक तथा आरंभिक नामावली अर्थ सहित दी गई है। सम्पूर्ण पाठ के लिए प्रामाणिक ग्रंथ अथवा गुरु-परंपरा का अनुसरण करें।

ध्यान श्लोक

शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥

Shuklaambaradharam Vishnum Shashivarnam Chaturbhujam. Prasannavadanam Dhyaayet Sarva-vighnopashaantaye.

श्वेत वस्त्र धारण किए, चंद्रमा के समान वर्ण वाले, चार भुजाओं वाले और प्रसन्न मुख वाले भगवान विष्णु का सभी विघ्नों की शांति के लिए ध्यान करना चाहिए।

One should meditate on Lord Vishnu — clad in white, moon-hued, four-armed and serene-faced — for the calming of all obstacles.

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशंविश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यंवन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

Shaantaakaaram Bhujagashayanam Padmanaabham Suresham, Vishvaadhaaram Gaganasadrisham Meghavarnam Shubhaangam. Lakshmikaantam Kamalanayanam Yogibhir-Dhyaanagamyam, Vande Vishnum Bhavabhayaharam Sarvalokaikanaatham.

शांत स्वरूप, शेषनाग पर शयन करने वाले, कमलनाभ, देवों के स्वामी, विश्व के आधार, आकाश के समान व्यापक, मेघवर्ण, शुभ अंगों वाले, लक्ष्मीपति, कमलनयन, योगियों द्वारा ध्यान में प्राप्त होने वाले, संसार के भय को हरने वाले, समस्त लोकों के एकमात्र नाथ भगवान विष्णु की मैं वंदना करता हूँ।

I bow to Vishnu — serene, reclining on the serpent, lotus-naveled, lord of the gods, support of the universe, vast as the sky, cloud-hued, auspicious-limbed, beloved of Lakshmi, lotus-eyed, attainable by yogis in meditation, remover of worldly fear, the one lord of all worlds.

आरंभिक नामावली (श्लोक १–२)

विश्वं विष्णुर्वषट्कारो भूतभव्यभवत्प्रभुः।भूतकृद्भूतभृद्भावो भूतात्मा भूतभावनः॥

Vishvam Vishnur-Vashatkaaro Bhuta-bhavya-bhavat-prabhuh. Bhutakrid-bhutabhrid-bhaavo Bhutaatma Bhutabhaavanah.

वे ही विश्व हैं, सर्वव्यापी विष्णु हैं, यज्ञ में आहुति रूप वषट्कार हैं, भूत-भविष्य-वर्तमान के स्वामी हैं, प्राणियों के रचयिता, पालनकर्ता, शुद्ध सत्ता, सबकी आत्मा और सबका पोषण करने वाले हैं।

पूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमा गतिः।अव्ययः पुरुषः साक्षी क्षेत्रज्ञोऽक्षर एव च॥

Pootaatma Paramaatma Cha Muktaanaam Paramaa Gatih. Avyayah Purushah Saakshi Kshetragyo-aksharah Eva Cha.

वे पवित्र आत्मा, परमात्मा, मुक्त जीवों की परम गति, अविनाशी, पुरुष, सबके साक्षी, क्षेत्रज्ञ और अक्षर हैं।

प्रथम बीस नाम — संक्षिप्त अर्थ

  1. विश्वम् — सम्पूर्ण ब्रह्मांड स्वरूप
  2. विष्णुः — सर्वत्र व्याप्त
  3. वषट्कारः — यज्ञ में आहुति रूप
  4. भूतभव्यभवत्प्रभुः — भूत, भविष्य, वर्तमान के स्वामी
  5. भूतकृत् — प्राणियों के रचयिता
  6. भूतभृत् — प्राणियों के पालक
  7. भावः — शुद्ध अस्तित्व
  8. भूतात्मा — समस्त प्राणियों की आत्मा
  9. भूतभावनः — प्राणियों का पोषण करने वाले
  10. पूतात्मा — पवित्र आत्मा
  11. परमात्मा — सर्वोच्च आत्मा
  12. मुक्तानां परमा गतिः — मुक्त जीवों की परम गति
  13. अव्ययः — क्षयरहित
  14. पुरुषः — देह में निवास करने वाले
  15. साक्षी — सबके साक्षी
  16. क्षेत्रज्ञः — क्षेत्र (शरीर) के ज्ञाता
  17. अक्षरः — अविनाशी
  18. योगः — योग द्वारा प्राप्त होने वाले
  19. योगविदां नेता — योगियों के नायक
  20. प्रधानपुरुषेश्वरः — प्रकृति और पुरुष के स्वामी

पाठ विधि

विष्णु सहस्रनाम का पाठ विशेष रूप से शुक्रवार, एकादशी तथा शनिवार को शुभ माना जाता है। स्वच्छ आसन पर बैठकर, भगवान विष्णु के चित्र अथवा शालिग्राम के समक्ष तुलसी दल अर्पित कर पाठ करें। पाठ से पूर्व ध्यान श्लोकों का उच्चारण करें।