श्री शिव चालीसा

Shri Shiv Chalisa

Deity: Lord ShivaType: Chalisa11 min readLanguage: HindiWith meaning & transliteration

Complete Shiv Chalisa with all chaupais and dohas, transliteration and meaning in Hindi.

शिव चालीसा का महत्व

शिव चालीसा भगवान शिव की चालीस चौपाइयों में रचित स्तुति है। सोमवार, प्रदोष तथा सावन मास में इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। श्रद्धापूर्वक पाठ करने से रोग, शोक और संकट दूर होते हैं तथा भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।कहत अयोध्यादास तुम, देउ अभय वरदान॥

Jai Ganesh Girija Suvan, Mangal Mool Sujaan. Kahat Ayodhyadas Tum, Deu Abhay Vardaan.

हे गिरिजा-पुत्र गणेश, मंगल के मूल और सुजान! अयोध्यादास प्रार्थना करते हैं — मुझे अभय का वरदान दीजिए।

चौपाई

जय गिरिजापति दीनदयाला।सदा करत संतन प्रतिपाला॥

Jai Girijapati Deendayaala. Sada Karat Santan Pratipaala.

हे पार्वतीपति, दीनों पर दया करने वाले! आप सदा संतों का पालन करते हैं।

भाल चन्द्रमा सोहत नीके।कानन कुण्डल नागफनी के॥

Bhaal Chandrama Sohat Neeke. Kaanan Kundal Naagphani Ke.

आपके मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित है और कानों में नागफनी के कुंडल शोभा देते हैं।

अंग गौर शिर गंग बहाये।मुण्डमाल तन क्षार लगाये॥

Ang Gaur Shir Gang Bahaaye. Mundmaal Tan Kshaar Lagaaye.

आपका शरीर गौरवर्ण है, शिर से गंगा बहती है, गले में मुण्डमाला और शरीर पर भस्म लगी है।

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे।छवि को देखि नाग मन मोहे॥

Vastra Khaal Baaghambar Sohe. Chhavi Ko Dekhi Naag Man Mohe.

आप बाघ की खाल का वस्त्र धारण करते हैं; आपकी छवि देखकर नाग भी मोहित हो जाते हैं।

मैना मातु की हवे दुलारी।बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

Maina Maatu Ki Have Dulaari. Baam Ang Sohat Chhavi Nyaari.

मैना की दुलारी पुत्री पार्वती आपके वाम अंग में निराली छवि के साथ सुशोभित हैं।

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

Kar Trishool Sohat Chhavi Bhaari. Karat Sada Shatrun Kshaykaari.

आपके हाथ में त्रिशूल सुशोभित है, जिससे आप सदा शत्रुओं का नाश करते हैं।

नन्दि गणेश सोहैं तहँ कैसे।सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

Nandi Ganesh Sohai Tah Kaise. Saagar Madhya Kamal Hai Jaise.

नंदी और गणेश आपके पास ऐसे शोभा देते हैं, जैसे सागर के मध्य कमल।

कार्तिक श्याम और गणराऊ।या छवि को कहि जात न काऊ॥

Kaartik Shyaam Aur Ganraau. Ya Chhavi Ko Kahi Jaat Na Kaau.

कार्तिकेय, श्याम और गणपति सहित आपकी इस छवि का वर्णन कोई नहीं कर सकता।

देवन जबहीं जाय पुकारा।तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥

Devan Jabahi Jaay Pukaara. Tab Hi Dukh Prabhu Aap Nivaara.

जब-जब देवताओं ने पुकारा, तब-तब हे प्रभु आपने उनके दुःख दूर किए।

किया उपद्रव तारक भारी।देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

Kiya Updrav Taarak Bhaari. Devan Sab Mili Tumahi Juhaari.

जब तारकासुर ने भारी उपद्रव किया, तब सभी देवताओं ने मिलकर आपसे प्रार्थना की।

तुरत षडानन आप पठायउ।लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥

Turat Shadaanan Aap Pathaayau. Lavnimesh Mah Maari Giraayau.

आपने तुरंत षडानन (कार्तिकेय) को भेजा, जिन्होंने पलभर में तारक को मार गिराया।

आप जलंधर असुर संहारा।सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

Aap Jalandhar Asur Sanhaara. Suyash Tumhaar Vidit Sansaara.

आपने जलंधर असुर का संहार किया; आपका सुयश सम्पूर्ण संसार में विख्यात है।

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥

Tripuraasur San Yuddh Machaai. Sabahi Kripa Kar Leen Bachaai.

आपने त्रिपुरासुर से युद्ध कर सब पर कृपा करते हुए देवताओं की रक्षा की।

किया तपहिं भागीरथ भारी।पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥

Kiya Tapahi Bhaagirath Bhaari. Purab Pratigya Taasu Puraari.

भागीरथ ने कठिन तप किया और हे पुरारी, आपने उनकी प्रतिज्ञा (गंगावतरण) पूर्ण की।

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं।सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

Daanin Mah Tum Sam Kou Naahi. Sevak Stuti Karat Sadaahi.

दानियों में आपके समान कोई नहीं; सेवक सदा आपकी स्तुति करते हैं।

वेद माहि महिमा तुम गाई।अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

Ved Maahi Mahima Tum Gaai. Akath Anaadi Bhed Nahi Paai.

वेदों में आपकी महिमा गाई गई है; आप अकथनीय और अनादि हैं, आपका भेद कोई नहीं पा सका।

प्रकटे उदधि मंथन में ज्वाला।जरत सुरासुर भए विहाला॥

Prakate Udadhi Manthan Mein Jwaala. Jarat Suraasur Bhaye Vihaala.

समुद्र मंथन में जब विष की ज्वाला प्रकट हुई, तब देव और असुर जलने लगे और व्याकुल हो गए।

कीन्ह दया तहँ करी सहाई।नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥

Keenh Daya Tah Kari Sahaai. Neelkanth Tab Naam Kahaai.

आपने दया करके विष पी लिया और सहायता की; तभी से आप 'नीलकंठ' कहलाए।

पूजन रामचंद्र जब कीन्हा।जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

Poojan Ramchandra Jab Keenha. Jeet Ke Lank Vibhishan Deenha.

जब श्रीरामचंद्र ने आपकी पूजा की, तब उन्होंने लंका जीतकर विभीषण को सौंप दी।

सहस कमल में हो रहे धारी।कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

Sahas Kamal Mein Ho Rahe Dhaari. Keenh Pareeksha Tabahi Puraari.

हे पुरारी, सहस्र कमलों से पूजा के समय आपने श्रीराम की भक्ति की परीक्षा ली।

एक कमल प्रभु राखेउ जोई।कमल नयन पूजन चहं सोई॥

Ek Kamal Prabhu Raakheu Joi. Kamal Nayan Poojan Chah Soi.

जब एक कमल कम पड़ा, तब कमलनयन श्रीराम ने अपना नेत्र अर्पित करना चाहा।

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

Kathin Bhakti Dekhi Prabhu Shankar. Bhaye Prasann Diye Ichchhit Var.

ऐसी कठिन भक्ति देखकर प्रभु शंकर प्रसन्न हुए और इच्छित वर प्रदान किया।

जय जय जय अनंत अविनाशी।करत कृपा सबके घटवासी॥

Jai Jai Jai Anant Avinaashi. Karat Kripa Sabke Ghatvaasi.

हे अनंत, अविनाशी! आपकी जय हो; आप सबके हृदय में निवास कर कृपा करते हैं।

दुष्ट सकल नित मोहि सतावैं।भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवैं॥

Dusht Sakal Nit Mohi Sataavai. Bhramat Rahau Mohi Chain Na Aavai.

सभी दुष्ट मुझे नित्य सताते हैं; मैं भटकता रहता हूँ और मुझे चैन नहीं मिलता।

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।यहि अवसर मोहि आन उबारो॥

Traahi Traahi Main Naath Pukaaro. Yahi Avsar Mohi Aan Ubaaro.

हे नाथ, मैं 'त्राहि-त्राहि' पुकारता हूँ; इस समय आकर मेरा उद्धार कीजिए।

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।संकट से मोहि आन उबारो॥

Lai Trishool Shatrun Ko Maaro. Sankat Se Mohi Aan Ubaaro.

त्रिशूल लेकर मेरे शत्रुओं का नाश कीजिए और मुझे संकट से उबार लीजिए।

मात-पिता भ्राता सब कोई।संकट में पूछत नहिं कोई॥

Maat-Pita Bhraata Sab Koi. Sankat Mein Poochhat Nahi Koi.

माता, पिता, भाई — संकट के समय कोई भी सुध नहीं लेता।

स्वामी एक है आस तुम्हारी।आय हरहु मम संकट भारी॥

Swami Ek Hai Aas Tumhaari. Aay Harahu Mam Sankat Bhaari.

हे स्वामी, केवल आपकी ही आस है; आकर मेरे भारी संकट को हर लीजिए।

धन निर्धन को देत सदा हीं।जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥

Dhan Nirdhan Ko Det Sada Hi. Jo Koi Jaanche So Phal Paahi.

आप निर्धन को सदा धन देते हैं; जो भी आपसे माँगता है, वह फल पाता है।

अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी।क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

Astuti Kehi Vidhi Karau Tumhaari. Kshamahu Naath Ab Chook Hamaari.

मैं किस विधि से आपकी स्तुति करूँ? हे नाथ, अब मेरी भूल क्षमा कीजिए।

शंकर हो संकट के नाशन।मंगल कारण विघ्न विनाशन॥

Shankar Ho Sankat Ke Naashan. Mangal Kaaran Vighn Vinaashan.

हे शंकर, आप संकटों का नाश करने वाले, मंगल के कारण और विघ्नों का विनाश करने वाले हैं।

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।शारद नारद शीश नवावैं॥

Yogi Yati Muni Dhyaan Lagaavai. Shaarad Naarad Sheesh Navaavai.

योगी, यति और मुनि आपका ध्यान लगाते हैं; सरस्वती और नारद आपको शीश झुकाते हैं।

नमो नमो जय नमः शिवाय।सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥

Namo Namo Jai Namah Shivaay. Sur Brahmaadik Paar Na Paay.

हे शिव, आपको बार-बार नमस्कार है; देवता और ब्रह्मा आदि भी आपका पार नहीं पा सके।

जो यह पाठ करे मन लाई।ता पर होत है शम्भु सहाई॥

Jo Yah Paath Kare Man Laai. Ta Par Hot Hai Shambhu Sahaai.

जो मन लगाकर यह पाठ करता है, उस पर भगवान शम्भु की कृपा होती है।

ऋनिया जो कोई हो अधिकारी।पाठ करे सो पावन हारी॥

Riniya Jo Koi Ho Adhikaari. Paath Kare So Paavan Haari.

जो कोई ऋणी अथवा अधिकारी इसका पाठ करता है, वह पवित्र हो जाता है।

पुत्र हीन कर इच्छा कोई।निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

Putra Heen Kar Ichchha Koi. Nishchay Shiv Prasaad Tehi Hoi.

जो संतान की इच्छा रखता है, उसे निश्चय ही शिव की कृपा से संतान प्राप्त होती है।

पंडित त्रयोदशी को लावे।ध्यान पूर्वक होम करावे॥

Pandit Trayodashi Ko Laave. Dhyaan Poorvak Hom Karaave.

त्रयोदशी के दिन पंडित बुलाकर ध्यानपूर्वक हवन कराए।

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा।तन नहिं ताके रहै कलेशा॥

Trayodashi Vrat Karai Hamesha. Tan Nahi Taake Rahai Kalesha.

जो सदा त्रयोदशी का व्रत करता है, उसके शरीर में कोई क्लेश नहीं रहता।

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥

Dhoop Deep Naivedya Chadhaave. Shankar Sammukh Paath Sunaave.

धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर शंकर के सम्मुख यह पाठ सुनाए।

जन्म जन्म के पाप नसावे।अन्त धाम शिवपुर में पावे॥

Janma Janma Ke Paap Nasaave. Ant Dhaam Shivpur Mein Paave.

इससे जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और अंत में शिवलोक की प्राप्ति होती है।

दोहा

नित्त नेम उठि प्रातः ही, पाठ करौ चालीसा।तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीशा॥

Nitt Nem Uthi Praatah Hi, Paath Karo Chalisa. Tum Meri Manokaamna, Poorn Karo Jagdeesha.

नित्य नियम से प्रातः उठकर चालीसा का पाठ करो; हे जगदीश्वर, आप मेरी मनोकामना पूर्ण कीजिए।

पाठ विधि

सोमवार अथवा प्रदोष के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें, धूप-दीप जलाएँ और शांत मन से शिव चालीसा का पाठ करें। "ॐ नमः शिवाय" का जप पाठ की पूर्णता प्रदान करता है।