शिव तांडव स्तोत्रम्
Shiv Tandav Stotram
Shiv Tandav Stotram by Ravana — Sanskrit text with transliteration and meaning.
शिव तांडव स्तोत्र का महत्व
शिव तांडव स्तोत्रम् की रचना लंकापति रावण ने की थी, जो भगवान शिव का परम भक्त था। कथा के अनुसार रावण ने कैलाश पर्वत उठाने के अहंकार में शिव को क्रुद्ध किया; तब भगवान शिव ने अपने अंगूठे से पर्वत दबाकर उसे दबा दिया। पीड़ा और पश्चाताप में रावण ने इस अद्भुत छंद-बद्ध स्तोत्र की रचना कर भगवान शिव को प्रसन्न किया। इसका लयबद्ध पाठ शक्ति, साहस और शिव-भक्ति का संचार करता है।
पूर्णता-सूचना: यहाँ स्तोत्र के प्रमुख एवं सर्वाधिक पठित श्लोक उच्चारण तथा अर्थ सहित दिए गए हैं, साथ ही फलश्रुति। सम्पूर्ण पंद्रह-श्लोकी पाठ हेतु प्रामाणिक ग्रंथ का अनुसरण करें।
Jataa-tavee-galaj-jala-pravaaha-paavita-sthale Gale-avalambya lambitaam bhujanga-tunga-maalikaam. Damad-damad-damad-daman-ninaada-vad-damar-vayam Chakaara chanda-taandavam tanotu nah shivah shivam.
जिनकी जटारूपी वन से प्रवाहित जल-धारा ने कंठ-प्रदेश को पवित्र कर दिया है, जिनके गले में ऊँचे सर्पों की माला लटक रही है, जो डमरू की 'डम-डम' ध्वनि के साथ प्रचंड तांडव करते हैं — वे शिव हमारा कल्याण करें।
Jataa-kataaha-sambhrama-bhraman-nilimpa-nirjharee Vilola-veechi-vallaree-viraajamaana-moordhani. Dhagad-dhagad-dhagaj-jvalal-lalaata-patta-paavake Kishora-chandra-shekhare ratih pratikshanam mama.
जिनके मस्तक पर जटाओं में गंगा की चंचल लहरें सुशोभित हैं, जिनके ललाट पर 'धग-धग' करती प्रचंड अग्नि प्रज्वलित है और जो बाल-चंद्र को शिरोधार्य किए हैं — उन शिव में मेरा अनुराग प्रतिक्षण बढ़ता रहे।
Dharaa-dharendra-nandinee-vilaasa-bandhu-bandhura Sphurad-diganta-santati-pramoda-maana-maanase. Kripaa-kataaksha-dhoranee-niruddha-durdharaapadi Kvachid-digambare mano vinodam-etu vastuni.
जो पार्वती के विलास के सुंदर साथी हैं, जिनका मन समस्त दिशाओं को आनंदित करता है, जिनकी कृपा-दृष्टि की धारा दुर्धर आपदाओं को रोक देती है — उन दिगंबर शिव में मेरा मन आनंद पाए।
Jataa-bhujanga-pingala-sphurat-phanaa-mani-prabhaa Kadamba-kunkuma-drava-pralipta-digvadhoo-mukhe. Madaandha-sindhura-sphurat-tvag-uttareeya-medure Mano vinodam-adbhutam bibhartu bhoota-bhartari.
जिनकी जटाओं में लिपटे सर्पों की मणियों की लालिमा से दिशा-रूपी वधुओं के मुख रंजित हैं, जो मतवाले गजराज की खाल को उत्तरीय के रूप में धारण करते हैं — उन प्राणियों के स्वामी शिव में मेरा मन अद्भुत आनंद धारण करे।
Sahasra-lochana-prabhrity-ashesha-lekha-shekhara Prasoona-dhooli-dhoranee vidhoosaraanghri-peetha-bhooh. Bhujanga-raaja-maalayaa nibaddha-jaata-jootakah Shriyai chiraaya jaayataam chakora-bandhu-shekharah.
इंद्र आदि समस्त देवताओं के मुकुटों के पुष्पों की धूलि से जिनके चरण-पीठ धूसरित हैं, जिनकी जटाएँ सर्पराज की माला से बँधी हैं और जो चंद्रमा को शिरोधार्य किए हैं — वे शिव हमें चिरस्थायी श्री (कल्याण) प्रदान करें।
Lalaata-chatvara-jvalad-dhananjaya-sphulinga-bhaa Nipeeta-pancha-saayakam naman-nilimpa-naayakam. Sudhaa-mayookha-lekhayaa viraajamaana-shekharam Mahaakapaali-sampade shiro-jataalam-astu nah.
जिनके ललाट की प्रज्वलित अग्नि की चिनगारी ने कामदेव को भस्म कर दिया, जिन्हें देवराज भी प्रणाम करते हैं, जिनके शिर पर अमृत-किरण वाला चंद्रमा सुशोभित है — उनकी जटाएँ हमें ऐश्वर्य प्रदान करें।
Karaala-bhaala-pattikaa-dhagad-dhagad-dhagaj-jvalad Dhananjayaahuti-krita-prachanda-pancha-saayake. Dharaa-dharendra-nandinee-kuchaagra-chitra-patraka Prakalpanaika-shilpini trilochane ratir-mama.
जिनके विकराल ललाट की 'धग-धग' जलती अग्नि में कामदेव आहुत हो गए, जो पार्वती के अंगों पर चित्रकारी करने वाले एकमात्र शिल्पी हैं — उन त्रिनेत्रधारी शिव में मेरा अनुराग हो।
Naveena-megha-mandalee niruddha-durdhara-sphurat Kuhoo-nisheethinee-tamah prabandha-baddha-kandharah. Nilimpa-nirjharee-dharas-tanotu kritti-sindhurah Kalaa-nidhaana-bandhurah shriyam jagad-dhurandharah.
जिनका कंठ नवीन मेघमंडल और अमावस्या की रात्रि के समान श्याम है, जो गंगा को धारण करते हैं, गजचर्म पहने हैं और चंद्रकला से सुशोभित हैं — वे जगत के भार को धारण करने वाले शिव हमें श्री प्रदान करें।
फलश्रुति
Idam hi nityam-evam-uktam-uttamottamam stavam Pathan-smaran-bruvan-naro vishuddhim-eti santatam. Hare gurau subhaktim-aashu yaati naanyathaa gatim Vimohanam hi dehinaam su-shankarasya chintanam.
जो मनुष्य इस उत्तमोत्तम स्तोत्र का नित्य पाठ, स्मरण अथवा उच्चारण करता है, वह सदा शुद्ध हो जाता है और शीघ्र ही भगवान शिव के प्रति परम भक्ति को प्राप्त करता है — कल्याणकारी शिव का चिंतन ही जीवों के मोह का नाश करता है।
पाठ विधि
शिव तांडव स्तोत्र का पाठ सोमवार, प्रदोष तथा महाशिवरात्रि पर विशेष फलदायी है। इसका पाठ लय और ताल के साथ करना चाहिए, क्योंकि इसकी छंद-रचना तांडव-नृत्य की गति को प्रतिबिंबित करती है। शिवलिंग के समक्ष भस्म और बेलपत्र अर्पित कर पाठ करें।
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